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आखिर किन लोगों ने इन्हे बाबा,संत,देवी मां बनाया?

Posted On: 30 Aug, 2017 में

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#Asumal_Sirumalani को आसाराम किसने बनाया…
#Sukhvinder_Kaur को राधे मां किसने बनाया…
#Nirmaljit_Singh_Narula को निरमल बाबा किसने बनाया…
#Rampal_Singh_Jatin को संत रामपाल किसने बनाया…
#Gurmeet_Singh को बाबा राम रहीम सिंह किसने बनाया…
अमीरों ने/ गरीबों ने/ महिलाओं ने/ लाचारी ने/ दुख ने/ अभाव ने/ शारीरिक शोषण ने/ मानसिक तनाव ने….आज शाम से ये सवाल मेंरे मन मे कौंध रहा है कि आखिर किन लोगों ने इन्हे बाबा, संत, देवी मां बनाया?

आप जरा ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि ऐसे भक्तों की संख्या में ज्यादा संख्या महिलाओं, गरीबों, और शोषितों की है.. इनमें कोई अपने बेटे से परेशान है तो कोई अपने बहू से किसी का जमीन का झगड़ा चल रहा तो किसी को कोर्ट-कचहरी के चक्कर में अपनी सारी जायदाद बेचनी पड़ी है. किसी को सन्तान चाहिए किसी को नौकरी!

यानी हर आदमी एक तलाश में है.. ये भीड़ रूपी जो तलाश है. ये धार्मिक तलाश नहीं है. ये भौतिक सुखों की तलाश है. ये एक दूसरे से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा है.जिसे स्वयं की तलाश होती है वो उसे भीड़ की जरूरत नहीं उसे तो एकांत की जरूरत होती है..

वो किसी रामपाल के पास नहीं, किसी राम कृष्ण परमहंस के पास जाता है.. वो किसी राम रहीम के पास नहीं.. रामानन्द के पास जाता है.. उसे पैसा, पद और नहीं चाहिए होता उसे चाहिए होता है तो ज्ञान.

लेकिन बड़ी बात कि आज ज्ञान की जरूरत किसे हैं.. ? आज तो उन साधू संतों की लोगों को जरूरत है जो नौकरी देने, सन्तान सुख देने और अमीर बनाने के सपने दिखाता है उसके यहाँ लोग टूट पड़ते हैं.. वहीं सत्य साईं बाबा के यहाँ नेताओं एयर अफसरों की लाइन लगी रहती थी, क्योंकि वो हवा से घड़ी, सोने की चैन, सोने शिवलिंग प्रगट कर देते थे, राख और शहद बांट रहे थे.

क्या ताज्जुब है कि जो साईं बाबा पूरे जीवन फकीरी में बिता दिए. उनकी मूर्तियों में सोने और हीरे जड़ें हैं.. जिस बुद्ध ने धार्मिक आडम्बरो को बड़ा झटका दिया संसार मे उन्हीं की सबसे ज्यादा मूर्तियां हैं.

दरअसल ये सब अन्धविश्वास एक दिन में पैदा नहीं होता, ये पूरा एक चक्र है.. जरा ध्यान से टीवी देखिये, रेडियो सुनिये, तो हम क्या देख रहें हैं..क्या सुन रहें हैं.. अन्धविश्वास ही तो देख रहें हैं.. वही तो सुन रहे हैं… यानी ठंडा माने कोकाकोला होता है, फलां बनियान पहन लो लड़कियां तुम्हारे लिए सब कुछ कर देंगी, ये इत्र लगाओ तो लड़कियां तुम्हारे लिए मर जाएंगी, इस कम्पनी की चड्ढी पहन लो तो गुंडे अपने आप भाग जाएंगे, ये पान मसाला खाओ स्वास्थ्य इतना ठीक रहेगा कि दिमाग खुल जाएगा..

ये सब बेवकूफियों पर रोक लगनी चाहिए या नहीं.. तभी हम इन धर्म के टट्टुओं से बच सकते है.. ये धार्मिक गुरु जो होतें हैं.. ये काउंसलर होते हैं. ये धार्मिक एडवर्टाइजमेंट करते हैं..जहां आदमी का विवेक शून्य हो जाता है..और आप वही करने लगतें हैं जो आपके अवचेतन में भर दिया जाता है..

आज जरुरत है जागरूकता की.. विवेक पैदा करने की. जरा तार्किक बनने की और उससे भी ज्यादा ज्ञान की तलाश में भटकते रहने की.. वरना हम यूँ ही भटकते रहेंगे…

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दीक्षा मिश्रा



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